
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार की दुनिया में एक बार फिर हलचल मच गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने G7 देशों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाए। यह कदम वैश्विक व्यापार संतुलन को हिला सकता है और भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। सवाल यह है कि ट्रंप ऐसा क्यों चाहते हैं और इसके पीछे उनकी असली रणनीति क्या है?
ट्रंप लंबे समय से अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के एजेंडे पर काम करते रहे हैं। उनका मानना है कि चीन, भारत और अन्य देशों के साथ अमेरिका का व्यापार संतुलित नहीं है। चीन की तरह भारत भी अमेरिका को बड़ी मात्रा में वस्तुएं निर्यात करता है, जबकि अमेरिकी सामान की खपत भारत में अपेक्षाकृत कम है। इसी असमानता को देखते हुए ट्रंप चाहते हैं कि भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए ताकि अमेरिकी उत्पाद प्रतिस्पर्धा में बराबरी कर सकें।
भारत के आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे हैं। अमेरिका का यह मानना है कि भारत अपने बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए पूरी तरह से नहीं खोलता और लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ज्यादा ध्यान देता है। ट्रंप का तर्क है कि अगर भारत को अमेरिकी बाजार का फायदा मिल रहा है तो अमेरिका को भी भारत में बराबरी का अवसर मिलना चाहिए।
G7 जैसे मंचों पर ट्रंप का यह दबाव वैश्विक राजनीति का हिस्सा भी है। वह अपने देश की जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका सबसे पहले है और वह विदेशी देशों के मुकाबले घरेलू उद्योगों की रक्षा करेंगे। चुनावी राजनीति में यह मुद्दा उनकी लोकप्रियता को बढ़ा सकता है।
हालांकि, भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाना सिर्फ अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर ही असर नहीं डालेगा बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी प्रभावित करेगा। भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवाइयां, टेक्नोलॉजी सेवाएं और उपभोक्ता वस्तुएं जाती हैं। अगर इन पर टैरिफ बढ़ा तो न केवल भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी महंगे उत्पाद खरीदने पड़ेंगे।
भारत सरकार ने पहले भी इस तरह की चुनौतियों का सामना किया है। मोदी सरकार “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं के तहत स्थानीय उद्योग को मजबूत बनाने पर काम कर रही है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम भारत को और ज्यादा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर सकता है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की मांगें सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी हैं। वह व्यापार युद्ध को अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाकर अमेरिका की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि वह अमेरिकी हितों की रक्षा करेंगे। लेकिन यह रणनीति भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव भी बढ़ा सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत किस तरह इस दबाव का सामना करता है और G7 देशों का रुख क्या होता है।



