
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक में एक और बड़ी छलांग लगाई गई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने Astra-II मिसाइल को और अधिक घातक और सटीक बनाने की दिशा में अहम सफलता हासिल की है। बताया जा रहा है कि DRDO को चीन की आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल PL-15 के फॉर्मूले की महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी मिली है, जिससे Astra-II मिसाइल के रेंज और टारगेटिंग सिस्टम में क्रांतिकारी सुधार किया जा रहा है।
Astra-II, भारत द्वारा विकसित मध्यम दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे भारतीय वायुसेना के सुखोई, तेजस और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों पर लगाया जा सकेगा। अब इस नई तकनीक के इस्तेमाल से यह मिसाइल 300 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन के विमान को सटीकता से भेद सकेगी। यह क्षमता भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की वायुसेना पर रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की PL-15 मिसाइल दुनिया की सबसे उन्नत एयर कॉम्बैट मिसाइलों में से एक है, और यदि DRDO ने उसके तकनीकी सिद्धांतों को सफलतापूर्वक Astra-II में लागू कर लिया, तो यह भारत की मिसाइल क्षमता को नए स्तर पर पहुंचा देगा। इस मिसाइल में डुअल-पल्स रॉकेट इंजन और उन्नत एक्टिव रडार सीकर लगाया जाएगा, जो किसी भी मौसम या इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की स्थिति में भी लक्ष्य को भेद सकेगा।
DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि Astra-II की परीक्षण प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले कुछ महीनों में इसका फाइनल ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाएगी। इस मिसाइल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से देश की हवाई सुरक्षा और आक्रामक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत Astra-II का विकास देश की तकनीकी स्वायत्तता का प्रतीक बन गया है। यह सफलता न केवल भारत को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि भविष्य में निर्यात के नए अवसर भी खोलेगी।



