अयोध्या पहुंचे भूटान पीएम दासो शेरिंग टोबगे: भगवान श्रीराम और हनुमानगढ़ी में किया दर्शन-पूजन

अयोध्या नगरी एक बार फिर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की साक्षी बनी जब भूटान के प्रधानमंत्री दासो शेरिंग टोबगे अपने विशेष दौरे पर भगवान श्रीराम की नगरी पहुंचे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भूटान के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। जैसे ही भूटान पीएम अयोध्या पहुंचे, वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने उनके स्वागत में जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
भूटान पीएम ने सबसे पहले भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर में दर्शन और पूजन किया। उन्होंने वहां की दिव्यता, अनुशासन और श्रद्धा का अनुभव करते हुए भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की गहराई को सराहा। इसके बाद वे अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचे और बजरंगबली की पूजा-अर्चना की। माना जाता है कि हनुमानगढ़ी के दर्शन के बिना अयोध्या की यात्रा अधूरी रहती है। यही कारण है कि भूटान पीएम ने वहां विधि-विधान से पूजा की और विश्व में शांति एवं समृद्धि की कामना की।
भूटान और भारत के बीच प्राचीनकाल से ही गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध रहे हैं। भगवान बुद्ध और वैदिक परंपरा से जुड़े अनेक सूत्र दोनों देशों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यही वजह है कि भूटान पीएम की अयोध्या यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक और कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का भी प्रतीक मानी जा रही है।
भूटान पीएम दासो शेरिंग टोबगे का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अयोध्या वैश्विक स्तर पर धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है। राम मंदिर के भव्य निर्माण और उद्घाटन के बाद यहां देश-विदेश से श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं। इस बीच भूटान जैसे पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री का आना इस बात का संकेत है कि अयोध्या केवल भारत की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।
कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी भूटान पीएम को आश्वस्त किया कि भारत-भूटान के संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच मैत्री, आध्यात्मिकता और सहयोग की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
अयोध्या की इस यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भगवान श्रीराम की नगरी केवल हिंदुओं की आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि वह मानवता, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। भूटान पीएम के दर्शन-पूजन ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि राम और हनुमान की भक्ति से जुड़े स्थल पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।



