बिहार में मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। राजद (RJD) द्वारा दायर की गई याचिका पर अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में हेरफेर की गई है, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि मतदाता सूची से लाखों नाम गायब हैं और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया चुनावी गड़बड़ी का मामला हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए कहा कि “यह मामला जनता के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है और इस पर प्राथमिकता से सुनवाई की जाएगी।” कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि वोटर लिस्ट को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपडेट किया गया है और हर व्यक्ति को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले हफ्तों में होनी है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी होंगी। यह केस सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है।



