
BRICS के मंच पर चीन अपनी आर्थिक और तकनीकी ताकत को बढ़ाने की रणनीति पर जोर दे रहा है। शी चिनफिंग के 5-पॉइंट प्लान में सहयोग, आर्थिक विकास और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
चीन की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। AI मॉडल, डिजिटल तकनीक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में चीनी कंपनियों का विस्तार भारत सहित कई देशों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
भारत BRICS के भीतर सहयोग बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन साथ ही घरेलू बाजार, डेटा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्थानीय उद्योगों से जुड़े हितों को लेकर भी सावधानी बरत रहा है। खासकर चीनी तकनीक और उत्पादों की संभावित बढ़ती पहुंच पर भारत की नजर बनी हुई है।
चीनी सामानों की बड़े पैमाने पर वैश्विक बाजार में मौजूदगी पहले से ही एक बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे में BRICS जैसे मंच का इस्तेमाल व्यापार और तकनीकी सहयोग के विस्तार के लिए होने पर भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इससे घरेलू विनिर्माण और भारतीय कंपनियों के हित प्रभावित न हों।
BRICS के बदलते स्वरूप के बीच AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था आने वाले समय में संगठन के सहयोग का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह वैश्विक तकनीकी सहयोग के अवसरों का लाभ उठाए और साथ ही रणनीतिक व आर्थिक हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।



