
ग्रीनलैंड में प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। इस परियोजना का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, कनाडा समेत कुछ देशों और पर्यावरण समूहों ने इस योजना का विरोध किया है। इसी विरोध पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है, जिसने विवाद को और तेज कर दिया है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर पश्चिमी देश एकजुट नहीं हुए तो “चीन उन्हें निगल जाएगा।”
ट्रंप के अनुसार, ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक क्षेत्र में मजबूत रक्षा ढांचा खड़ा करना अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि ‘गोल्डन डोम’ न सिर्फ सुरक्षा कवच देगा, बल्कि आर्कटिक में बढ़ती चीनी और रूसी गतिविधियों पर भी लगाम लगाएगा। ट्रंप ने कनाडा के विरोध को “अल्पदृष्टि वाला” बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले भविष्य में पूरे उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं।
कनाडा की आपत्तियों का मुख्य आधार पर्यावरणीय चिंता और क्षेत्रीय संतुलन बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर सैन्य या तकनीकी ढांचे का निर्माण स्थानीय पर्यावरण और वहां रहने वाले समुदायों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं आर्कटिक को नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना सकती हैं।
ट्रंप का बयान केवल कनाडा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि सहयोगी देश अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं के साथ नहीं चलते, तो इसका फायदा चीन जैसे देश उठाएंगे। ट्रंप ने चीन पर आरोप लगाया कि वह आर्कटिक में निवेश और बुनियादी ढांचे के जरिए धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। उनके मुताबिक, पश्चिमी देशों को अभी सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि आर्कटिक क्षेत्र आने वाले समय में वैश्विक राजनीति का अहम केंद्र बनने वाला है। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और सैन्य महत्व इसे महाशक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। ‘गोल्डन डोम’ परियोजना इसी बड़े खेल का हिस्सा मानी जा रही है।



