CM योगी ने गाय और मोर को खिलाया गुड़, गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ के किए दर्शन-पूजन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परंपरागत रूप से गोरखनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर गुरु गोरखनाथ जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में गायों और मोरों को गुड़ खिलाकर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति अपनी आस्था को पुनः प्रकट किया। योगी आदित्यनाथ, जो स्वयं गोरखनाथ मठ के महंत हैं, अक्सर इस प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर समाज को ‘धर्म, सेवा और सदाचार’ का संदेश देते हैं।
गोरखनाथ मंदिर न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे उत्तर भारत में आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। गुरु गोरखनाथ को योग और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर प्रदेश की शांति, समृद्धि और जनता के कल्याण की प्रार्थना की।
गाय और मोर को गुड़ खिलाने का यह दृश्य भक्तों और मंदिर परिसर में मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। भारतीय परंपरा में गाय को ‘माता’ का स्थान दिया गया है और मोर को भगवान श्रीकृष्ण का वाहन तथा शुभता का प्रतीक माना जाता है। योगी आदित्यनाथ ने अपने इस कदम से यह संदेश दिया कि सनातन धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाना और पशु-पक्षियों के प्रति करुणा रखना मानव जीवन का प्रमुख कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा से ही गोरखनाथ मंदिर से गहरा जुड़ाव रखते हैं। बतौर महंत, वे मंदिर की परंपराओं और व्यवस्था का संचालन वर्षों से करते आ रहे हैं। चाहे अवसर कोई भी हो, वे यहां नियमित रूप से पूजा-पाठ, हवन और सेवा कार्यों में शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में गौशाला भी संचालित होती है, जहां बड़ी संख्या में गायों की सेवा की जाती है। योगी जी स्वयं समय-समय पर यहां आकर गायों को चारा खिलाते हैं और उनकी देखभाल की व्यवस्था का निरीक्षण भी करते हैं।
इस बार उन्होंने खासतौर पर मंदिर के मोरों को भी गुड़ खिलाकर यह दर्शाया कि सभी जीव-जंतु भगवान की सृष्टि का हिस्सा हैं और उनका संरक्षण मानव समाज का दायित्व है। यह दृश्य सोशल मीडिया और समाचारों में तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने मुख्यमंत्री की इस सादगी और धार्मिक भावना की सराहना की।
गोरखनाथ मंदिर की धार्मिक आभा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भक्ति भावना एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करती है कि कैसे राजनीति और धर्म मिलकर समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैला सकते हैं। योगी आदित्यनाथ का यह कदम न केवल श्रद्धालुओं को प्रेरित करता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह संदेश देता है कि अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहना ही सच्ची समृद्धि और शांति का मार्ग है।



