
भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया ने हाल ही में अपने साहसिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह पहलगाम अटैक का जवाब देना उनके लिए न सिर्फ ड्यूटी थी बल्कि देश के प्रति कर्तव्य का प्रश्न भी था। उन्होंने कहा कि जब वह इस मिशन पर जा रही थीं, तब उन्होंने अपनी मां से भावुक होकर कहा था- “अगर मैं लौटूं तो जीत के साथ लौटूंगी, वरना तिरंगे में लिपटकर आऊंगी।” यह शब्द न केवल उनके साहस को दर्शाते हैं बल्कि उस गहरी देशभक्ति को भी उजागर करते हैं, जो हर भारतीय सैनिक के दिल में बसती है।
कर्नल सोफिया ने यह भी साझा किया कि आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान सैनिक किस मानसिक स्थिति से गुजरते हैं। उन्होंने बताया कि दुश्मन को जवाब देना जरूरी होता है क्योंकि सेना का हर जवान जानता है कि उसकी सुरक्षा पर पूरा देश टिका हुआ है। पहलगाम अटैक का जवाब सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि हौसले और जज्बे से दिया गया। यही कारण है कि भारतीय सेना हर बार दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देती आई है।
सोफिया जब कौन बनेगा करोड़पति (KBC) के मंच पर पहुंचीं तो उन्होंने अपनी वीरता की कई कहानियां सुनाकर सभी दर्शकों को गर्व से भर दिया। अमिताभ बच्चन ने भी उनकी बहादुरी को सलाम किया और कहा कि ऐसी कहानियां सुनकर हर भारतीय का सिर ऊंचा हो जाता है। KBC के इस मंच ने न केवल कर्नल सोफिया की गाथा को लोगों तक पहुंचाया बल्कि देश की युवा पीढ़ी को भी यह संदेश दिया कि देशभक्ति सबसे बड़ा धर्म है।
उन्होंने बताया कि आर्मी की ट्रेनिंग और मिशन पर जाने से पहले हर सैनिक अपने परिवार से दिल से जुड़ी बातें करता है। खासतौर पर मां से विदाई लेना सबसे कठिन होता है, लेकिन जब सीने पर तिरंगा हो और दिल में देश के लिए बलिदान का जज्बा, तब हर दर्द छोटा लगने लगता है। कर्नल सोफिया ने कहा कि सेना में महिला अधिकारी होना आसान नहीं है, लेकिन जब लक्ष्य देश की सुरक्षा हो तो हर चुनौती स्वीकार्य हो जाती है।
आज कर्नल सोफिया लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनकी यह कहानी केवल एक सैन्य अभियान की दास्तान नहीं बल्कि उस जज्बे की मिसाल है, जो भारत को मजबूती देता है। पहलगाम अटैक के बाद उनकी बहादुरी और समर्पण ने साबित कर दिया कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की रक्षा करने के लिए तत्पर है।
देश के लोग कर्नल सोफिया जैसी वीरांगनाओं को देखकर गर्व महसूस करते हैं। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर मन में साहस हो और दिल में देशप्रेम, तो कोई भी मुश्किल पहाड़ नहीं बन सकती। सच कहा जाए तो कर्नल सोफिया जैसी शूरवीर महिलाएं ही नए भारत की पहचान हैं।



