वोटों की चोरी कांग्रेस ने की थी: गोरखपुर में ओपी राजभर का बड़ा बयान, नेहरू को पीएम बनाने का लगाया आरोप

गोरखपुर की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता ओमप्रकाश राजभर ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। राजभर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में वोटों की चोरी की शुरुआत कांग्रेस ने की थी। उनका दावा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस ने उस दौर में वोटों की हेराफेरी की और सत्ता हासिल की। यह बयान देते हुए राजभर ने सीधे-सीधे कांग्रेस की नीतियों और उनके इतिहास पर सवाल उठाया।
ओपी राजभर ने गोरखपुर की सभा में कहा कि भारत के पहले आम चुनाव के दौरान सच्चाई को दबाया गया और कांग्रेस ने विपक्षी नेताओं के मतदाताओं को हाशिए पर धकेलकर नेहरू को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। उन्होंने दावा किया कि अगर उस समय वोटों की गिनती निष्पक्ष तरीके से होती, तो भारत का राजनीतिक इतिहास कुछ और होता। राजभर ने इस अवसर पर जनता से अपील की कि वे कांग्रेस के इस तथाकथित इतिहास को याद रखें और वोट डालते समय पूरी सजगता दिखाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “पारदर्शिता और सुशासन” की बात करते हैं, तो इसका असली कारण यही है कि अतीत में कांग्रेस ने बार-बार लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ किया। राजभर ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि उसने गरीबों, किसानों और पिछड़े वर्गों का केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और कभी भी उनके वास्तविक विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
गोरखपुर की इस जनसभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और राजभर के बयान पर जमकर तालियां बजीं। हालांकि, उनके इस आरोप से एक बार फिर भारतीय राजनीति में नेहरू युग की बहस छिड़ गई है। कांग्रेस जहां हमेशा अपने इतिहास को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़कर गौरवपूर्ण बताती रही है, वहीं राजभर जैसे नेता लगातार उसके अंधकारमय पक्ष को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजभर के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सहयोगी दल की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। दरअसल, ओपी राजभर ने हाल ही में बीजेपी के साथ गठबंधन मजबूत किया है और उनके बयान अक्सर विपक्ष पर हमलावर रहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप न केवल कांग्रेस की छवि को चुनौती देते हैं बल्कि विपक्षी दलों के बीच भी असहजता पैदा करते हैं।
अंत में कहा जा सकता है कि गोरखपुर में ओपी राजभर का यह बयान कांग्रेस बनाम विपक्ष की राजनीति को और तीखा करेगा। आने वाले चुनावों में इस तरह के बयान वोटरों के रुझान पर असर डाल सकते हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बनकर उभरता है या नहीं।



