
भारत के सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court of India में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को लेकर तैयार किए गए नियमों और दिशा-निर्देशों पर बहस जारी है। न्यायिक कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच अदालत ने प्रस्तावित नियमों के मसौदे पर विभिन्न हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
अदालत की ओर से जारी प्रक्रिया के तहत कानूनी विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों को 20 जून तक अपने सुझाव भेजने का अवसर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का उपयोग न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
AI तकनीक का उपयोग दस्तावेजों के विश्लेषण, शोध सहायता, केस मैनेजमेंट और अन्य प्रशासनिक कार्यों में संभावित रूप से किया जा सकता है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पक्षपात (Bias) और मानवीय निगरानी जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक प्रणाली में AI के उपयोग से कार्यक्षमता बढ़ सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय प्रक्रिया में मानवीय विवेक और न्यायिक स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए नियमों का मसौदा तैयार किया जा रहा है।
20 जून तक प्राप्त सुझावों और टिप्पणियों के आधार पर नियमों में आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं। न्यायिक और तकनीकी जगत की नजर अब इस प्रक्रिया पर बनी हुई है, क्योंकि इसके परिणाम भविष्य में भारतीय न्यायपालिका में AI के उपयोग की दिशा तय कर सकते हैं।



