यूपी में डेंगू-चिकनगुनिया जांच को मिलेगा बल, बढ़ेंगी सेंटिनल लैब और गांवों में चलेंगी मोबाइल प्रयोगशालाएं

उत्तर प्रदेश में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की समय पर पहचान और नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग जांच सुविधाओं का विस्तार करने की तैयारी में है। इसके तहत राज्य में सेंटिनल प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि अधिक से अधिक जिलों में जांच सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बढ़ती जांच क्षमता से संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान संभव होगी और संक्रमण की स्थिति पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी। इससे रोग नियंत्रण और उपचार व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल प्रयोगशालाएं भी संचालित की जाएंगी। ये मोबाइल लैब गांवों और दूरदराज के इलाकों में जाकर नमूने एकत्र करने तथा प्राथमिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोगों में समय पर जांच और निदान बेहद महत्वपूर्ण होता है। शुरुआती स्तर पर संक्रमण की पहचान होने से मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सकता है और बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, जागरूकता अभियान चलाने और मच्छर नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने के भी निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
राज्य सरकार का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाना है ताकि मौसमी बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रयोगशालाओं और मोबाइल जांच इकाइयों के विस्तार से लोगों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
विशेषज्ञों ने लोगों से भी अपील की है कि बुखार, शरीर दर्द, जोड़ों में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और स्वयं दवा लेने से बचें।



