
भारत की वैश्विक स्तर पर बढ़ती हुई आर्थिक और कूटनीतिक भूमिका का एक और प्रमाण हाल ही में तब सामने आया जब डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की। इस वार्ता के दौरान डेनमार्क की पीएम ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए खुला और स्पष्ट समर्थन व्यक्त किया। यह कदम न केवल भारत और डेनमार्क के बीच संबंधों को और मजबूती देगा, बल्कि भारत-ईयू रिश्तों में भी नई ऊर्जा का संचार करेगा।
भारत और यूरोपीय संघ लंबे समय से मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना, निवेश को बढ़ावा देना और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री का समर्थन इस प्रक्रिया में एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि यह यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देशों को भी भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी को गहराने के लिए प्रेरित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी और डेनमार्क की पीएम के बीच हुई इस वार्ता में हरित ऊर्जा, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह सभी विषय भारत-यूरोप संबंधों में लंबे समय से प्राथमिकता पर रहे हैं। खासतौर पर भारत और डेनमार्क ने “ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” के तहत पर्यावरण संरक्षण और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
भारत के लिए यूरोपीय संघ एक बड़ा व्यापारिक और निवेश का केंद्र है। यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। यदि यह मुक्त व्यापार समझौता लागू होता है, तो भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक और अधिक सहज पहुंच मिलेगी। वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था आकर्षण का केंद्र बनेगी।
डेनमार्क की पीएम का समर्थन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद और व्यापारिक तनाव बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता और नई दिशा देने में मददगार साबित हो सकता है।
इसके अलावा, इस वार्ता से यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि डेनमार्क भारत को न केवल एक बड़े आर्थिक साझेदार के रूप में देखता है, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भी मान्यता देता है। यह भारत की बढ़ती हुई वैश्विक छवि और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कूटनीति का परिणाम है।
अंततः कहा जा सकता है कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री द्वारा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को समर्थन दिया जाना भारत की कूटनीतिक जीत है। यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और भारत-यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग को और गहराई देगा। इससे भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत और निर्णायक स्थान हासिल करने में भी मदद मिलेगी।



