
कहते हैं, अगर जज़्बा सच्चा हो तो उम्र कभी मायने नहीं रखती — और इसका बेहतरीन उदाहरण हैं 14 साल की दिया लोपा, जिन्होंने अपने छोटे से कदम से एक बड़ा वैश्विक बदलाव शुरू कर दिया है। दिया लोपा ने अपने घर के पुराने लैपटॉप, बैटरियां और मोबाइल गैजेट्स को रीसायकल करने की पहल शुरू की थी, जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 देशों तक फैल चुका ‘कबाड़ हटाओ’ अभियान बन गया है।
दिल्ली की रहने वाली दिया ने 2021 में यह मिशन शुरू किया था, जब उन्होंने देखा कि घर और स्कूल में पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों का ढेर लग रहा है। उन्हें समझ आया कि यह ई-वेस्ट (Electronic Waste) न केवल जगह घेरता है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसी सोच से उन्होंने “कबाड़ हटाओ, धरती बचाओ” नाम से एक सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया।
धीरे-धीरे उनके इस अभियान को भारत के कई स्कूलों, एनजीओ और पर्यावरण संस्थाओं का समर्थन मिला। दिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर 5000 से अधिक किलो ई-वेस्ट को रीसायकल सेंटरों तक पहुंचाया। उनकी इस पहल की खास बात यह रही कि उन्होंने बच्चों को यह सिखाया कि कैसे पुराने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को जिम्मेदारी से निपटाया जा सकता है और रीसायकलिंग के ज़रिए नई चीजें बनाई जा सकती हैं।
आज दिया का यह अभियान भारत के अलावा जापान, जर्मनी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, नेपाल, सिंगापुर, केन्या, कनाडा और यूएई जैसे देशों तक पहुंच चुका है। वहां के बच्चे और युवाओं ने भी दिया से प्रेरणा लेकर अपने-अपने देशों में “ई-वेस्ट कलेक्शन ड्राइव” शुरू की है।
दिया लोपा को हाल ही में “यंग एनवायरनमेंट चैंपियन” के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। उनका कहना है, “हम सब मिलकर धरती को बेहतर बना सकते हैं, बस शुरुआत अपने घर से करनी होगी।”
दिया की इस कहानी से यह साफ है कि परिवर्तन की उम्र नहीं होती, बस नीयत साफ और लक्ष्य बड़ा होना चाहिए। उनका “कबाड़ हटाओ” अभियान न केवल भारत की शान है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि नई पीढ़ी पर्यावरण की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है।



