दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेंद्र कश्यप का बयान: योगी सरकार की संवेदनशील सोच का प्रमाण
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में दिव्यांगजनों के हित में लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि “यह निर्णय योगी सरकार की संवेदनशील सोच का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मंत्री नरेंद्र कश्यप का यह बयान उस समय आया जब सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए एक नई योजना की घोषणा की, जिसके अंतर्गत उन्हें रोजगार, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेष सुविधाएं और अवसर दिए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य दिव्यांगजनों को न केवल सहायता देना है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाना भी है।
मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने दिव्यांगजनों की समस्याओं को केवल “कल्याण” के नजरिए से नहीं देखा, बल्कि उन्हें सक्षम नागरिक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। विभिन्न जिलों में दिव्यांगजन सहायता शिविर लगाए जा रहे हैं, जहाँ निःशुल्क उपकरण वितरण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड और अन्य सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि दिव्यांग छात्रों को स्कॉलरशिप, छात्रावास सुविधा और डिजिटल शिक्षा तक पहुंच देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की गई है। ट्रेनों और बसों में सुविधाएं बढ़ाने, सार्वजनिक स्थानों को “दिव्यांग अनुकूल” बनाने, और शौचालयों व लिफ्ट्स में सुधार जैसे कदम भी सरकार ने उठाए हैं।
नरेंद्र कश्यप ने योगी सरकार की कार्यशैली को “जनकल्याण केंद्रित” और “न्यायप्रिय” बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य बन रहा है, जहाँ हर नागरिक, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो, आत्मनिर्भर बन सकता है।
यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को भी समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। योगी सरकार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श बन सकती है।
दिव्यांगजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे “दृष्टिकोण में बदलाव” की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना है। यह कदम वास्तव में भारत को एक सशक्त और समावेशी समाज की ओर ले जाने में मदद करेगा।



