
राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग एक बार फिर चर्चा में है। एडवोकेट तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में पुरुषों से जुड़े कई सामाजिक, पारिवारिक और कानूनी मामलों के समाधान के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय पुरुष आयोग का गठन आवश्यक हो गया है। उनका कहना है कि महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए विभिन्न संस्थाएं कार्य कर रही हैं, उसी प्रकार पुरुषों की शिकायतों, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक विवादों और कथित कानूनी उत्पीड़न जैसे मामलों की निष्पक्ष सुनवाई के लिए भी एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था होनी चाहिए।
एडवोकेट तिवारी के अनुसार, राष्ट्रीय पुरुष आयोग का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि पुरुषों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक संतुलित और न्यायसंगत व्यवस्था विकसित करना होना चाहिए। उनका कहना है कि कई मामलों में पुरुषों को भी सामाजिक दबाव, घरेलू विवाद, मानसिक तनाव, अभिभावक अधिकार, झूठे मुकदमों के आरोप और आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों के अध्ययन, शिकायतों के निस्तारण, नीति निर्माण और सरकार को आवश्यक सुझाव देने के लिए एक आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इस विषय पर अलग-अलग सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों की राय भिन्न है और इस पर व्यापक सार्वजनिक व विधायी चर्चा की आवश्यकता बताई जाती है।



