केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान देश में बढ़ती गरीबी पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, “मनमोहन सिंह और पी.वी. नरसिंह राव ने आर्थिक सुधारों की दिशा में अच्छा काम किया था, लेकिन अब भी देश में गरीबी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।” गडकरी के इस बयान को राजनीतिक हलकों में संतुलित और आत्ममंथन की दृष्टि से देखा जा रहा है।
गडकरी ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में जब तक अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुधार नहीं आता, तब तक विकास अधूरा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आर्थिक विकास के बावजूद सामाजिक विषमता और गरीबी अब भी चिंता का विषय है।
उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर बीजेपी नेता पूर्व कांग्रेस प्रधानमंत्रियों की तारीफ नहीं करते। गडकरी के इस संतुलित बयान को राजनीतिक संवाद में एक “परिपक्व आवाज़” के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश को ऐसे विकास मॉडल की ज़रूरत है, जो केवल GDP नहीं, बल्कि सामान्य नागरिक की आमदनी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन स्तर में भी सुधार लाए।
नीतिन गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी (BJP) ने भी गरीबी हटाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और जनधन योजना। लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि केवल योजनाएं शुरू करना काफी नहीं, उनका धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत को “विकास के साथ न्याय” की नीति अपनानी होगी, जिससे न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी लोगों को जीवन की बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। गडकरी ने यह भी कहा कि आर्थिक विकास को ‘गांव, गरीब और किसान’ केंद्र में रखकर तय करना होगा।



