
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026 में दुनिया के रहने लायक शहरों की रैंकिंग जारी की गई है। इस सूची में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन को शीर्ष स्थान मिला है। शहरों का मूल्यांकन स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आधारभूत ढांचे, स्थिरता, संस्कृति और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है।
रैंकिंग में यूरोप और विकसित देशों के कई शहरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इन शहरों की खासियत बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं, मजबूत परिवहन व्यवस्था, स्वच्छ पर्यावरण और नागरिकों के लिए उच्च जीवन स्तर को माना जाता है।
भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई की रैंकिंग पर भी लोगों की नजर रहती है। इन शहरों में आर्थिक अवसर तो बहुत हैं, लेकिन बढ़ती आबादी, प्रदूषण, ट्रैफिक, आवास और शहरी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां लिवेबिलिटी स्कोर को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी शहर को रहने योग्य बनाने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं होता। बेहतर शहरी योजना, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स शहरों को बेहतर बनाने के लिए नीति निर्माताओं को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।



