
असम के दरांग जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपने आप को भगवान शिव का भक्त बताते हुए एक बेहद खास संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं शिव का भक्त हूं और शिव की तरह सारा जहर निगल जाता हूं।” उनके इस बयान ने वहां मौजूद हजारों लोगों के बीच एक नई ऊर्जा भर दी। मोदी ने अपने भाषण में यह स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे कितनी भी नकारात्मक बातें फैलाए या कितने भी आरोप लगाए, वे किसी भी तरह के कटु शब्दों या गलतफहमियों से प्रभावित नहीं होते। वे इन सबको समाज और राष्ट्रहित में सहन कर लेते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं।
पीएम मोदी ने असम की जनता से अपने गहरे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह भी बताया कि बीते वर्षों में असम में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। दरांग की जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार असम के हर जिले के विकास के लिए कृतसंकल्प है और यहां की सांस्कृतिक धरोहर को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी।
मोदी ने कहा कि जैसे भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान विषपान कर अमृत की रक्षा की थी, वैसे ही वे भी देशहित और जनता की सेवा के लिए हर प्रकार की कठिनाइयों और आलोचनाओं को सहन करने के लिए तैयार हैं। यह बयान केवल धार्मिक संदर्भ नहीं था, बल्कि इसमें राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी निहित था। उन्होंने यह संदेश दिया कि असली नेतृत्व वही है जो हर प्रकार की चुनौतियों और आलोचनाओं को स्वीकार कर जनता की भलाई के लिए काम करता है।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें सिर्फ वोटबैंक की राजनीति में उलझी रहती थीं, जबकि आज केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार असम को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने का काम कर रही है। मोदी ने युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का जिक्र किया और कहा कि असम अब तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
दरांग की इस रैली में पीएम मोदी के शिव भक्त वाले बयान ने माहौल को धार्मिक और आध्यात्मिक रंग भी दे दिया। वहां मौजूद लोग “हर-हर महादेव” के नारों से गूंज उठे। मोदी ने अंत में यही कहा कि उनकी सरकार केवल सत्ता पाने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए बनी है। वे हर मुश्किल को सहन करते हुए असम और भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।



