
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापना के लिए अपनी योजना साझा की है। उन्होंने कहा, “गाजा में अपने कदम रखना चाहता हूं”, और समझौते पर हस्ताक्षर से पहले हमास को तीन से चार दिन का समय दिया।
ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान गाजा में शांति के लिए 20 सूत्री समझौता पेश किया था। इस समझौते के तहत गाजा से हमास और अन्य आतंकी समूहों के हथियार छोड़ने की बात कही गई है। ट्रंप ने हमास को धमकी दी है कि यदि वे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
ट्रंप ने वर्जीनिया के क्वांटिको में अमेरिकी जनरलों और एडमिरल्स से कहा, “हमें एक हस्ताक्षर की जरूरत है। अगर वे (हमास) हस्ताक्षर नहीं करते हैं तो उस हस्ताक्षर की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। मुझे उम्मीद है कि वे अपने भले के लिए हस्ताक्षर करेंगे और कुछ बेहतरीन करेंगे।”
समझौते के तहत युद्धविराम के 72 घंटे के भीतर सभी बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा। अभी गाजा में 48 बंधक हैं, जिनमें से 20 के जीवित होने की संभावना है। इसके साथ ही पट्टी से सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा और इसका प्रशासन एक संक्रमणकालीन सरकार को सौंपा जाएगा। यह सरकार ट्रंप की अध्यक्षता में बने शांति बोर्ड के अधीन काम करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को गाजा शांति समझौते की सफलता पर बधाई दी है। उन्होंने इसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। यह शांति प्रयासों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए समर्थन और रणनीतियों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
गाजा में शांति स्थापना के लिए ट्रंप की पहल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।



