संयुक्त राष्ट्र (UN) की हाल ही में जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने वैश्विक स्वास्थ्य जगत में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर के 1.4 करोड़ बच्चों को एक भी वैक्सीन नहीं लग पाई, जिससे ये बच्चे जानलेवा बीमारियों के बेहद गंभीर खतरे में हैं। UNICEF और WHO द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़ा न सिर्फ चिंता का विषय है, बल्कि आने वाले समय में महामारी जैसी स्थितियों को जन्म दे सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह वैक्सीनेशन गैप ज्यादातर कम आय वाले देशों और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में देखने को मिला है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं या तो नाकाफी हैं या पूरी तरह ठप पड़ी हैं। इसके पीछे युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, और वैक्सीनेशन को लेकर जागरूकता की कमी जैसे कई बड़े कारण बताए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मुद्दे को तुरंत नहीं सुलझाया गया, तो खसरा, पोलियो, डिप्थीरिया और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। यह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है।
UN ने सभी देशों से अपील की है कि वे बच्चों के टीकाकरण को प्राथमिकता दें और “Zero-Dose” यानी जिन बच्चों को अब तक एक भी वैक्सीन नहीं लगी, उनके लिए विशेष अभियान चलाएं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि तकनीकी सहायता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सार्वजनिक जागरूकता इस संकट को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यह रिपोर्ट हमें यह भी याद दिलाती है कि टीकाकरण सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक ज़िम्मेदारी है, जिससे पूरी मानवता को सुरक्षित किया जा सकता है। अब वक्त आ गया है कि सभी सरकारें, स्वास्थ्य संगठन और नागरिक इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।



