
भारत और चीन के बीच लगभग पांच साल बाद फिर से डायरेक्ट फ्लाइट सेवा शुरू होने जा रही है। यह सेवा 26 अक्टूबर 2025 से शुरू होगी। कोरोनाकाल के दौरान मार्च 2020 में भारत और चीन के बीच सभी डायरेक्ट फ्लाइट सेवाएं रोक दी गई थीं। महामारी के कारण दोनों देशों के बीच यात्रा पर कई वर्षों तक पाबंदी रही। अब कोरोना प्रतिबंधों में ढील मिलने और सामान्य परिस्थितियों के बहाल होने के बाद दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक और पर्यटन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इस नई डायरेक्ट फ्लाइट की पहली उड़ान कोलकाता से चीन के ग्वांगझू शहर के लिए रवाना होगी। कोलकाता का चयन इस उड़ान के लिए इसलिए किया गया क्योंकि पूर्वी भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बीच वाणिज्यिक और व्यापारिक संपर्क को बढ़ावा देने के लिए यह शहर एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ग्वांगझू, चीन का एक प्रमुख औद्योगिक और वाणिज्यिक शहर है, जो भारतीय व्यापारियों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में जाना जाता है।
सभी तैयारियों को देखते हुए दोनों देशों के नागरिकों और व्यवसायियों को एक सुविधाजनक और तेज़ विकल्प मिलेगा। यह फ्लाइट व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को फिर से गति देने में मदद करेगी। उड़ान की नियमितता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों ने सभी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दे दिया है।
भारत-चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट की बहाली से भारतीय व्यापारियों को लाभ मिलेगा। कोलकाता से ग्वांगझू तक उड़ान केवल समय की बचत नहीं करेगी, बल्कि माल और सेवाओं के आदान-प्रदान को भी आसान बनाएगी। इसके अलावा, यह नई उड़ान भारतीय पर्यटकों को चीन के प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा का अवसर भी प्रदान करेगी। छात्रों और शिक्षाविदों के लिए भी यह कदम विशेष महत्व रखता है, क्योंकि दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पालन इस उड़ान में प्राथमिकता रहेगा। महामारी के दौरान किए गए अनुभवों के आधार पर दोनों देशों ने यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। यात्रियों को उड़ान से पहले आवश्यक दस्तावेज़, कोविड टेस्ट रिपोर्ट और अन्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।
इस नई डायरेक्ट फ्लाइट सेवा की शुरुआत से भारत और चीन के बीच पर्यटन, वाणिज्य और सांस्कृतिक संबंधों में नयापन आएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच पुराने और मजबूत संबंधों को फिर से सक्रिय करने का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच यात्रा और व्यापार में और तेजी आएगी।



