
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह डील न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ी राहत लेकर आएगी। इस समझौते के तहत आयात-निर्यात पर लगने वाले कई तरह के शुल्क (ड्यूटी) घटाए या खत्म किए जाने की संभावना है, जिससे कई रोजमर्रा और प्रीमियम सामान सस्ते हो सकते हैं। भारत के लिए यह डील निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर खोलेगी, वहीं EU को भारत जैसे बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
इस डील के लागू होते ही सबसे पहले ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स सस्ते होने की उम्मीद है। यूरोप की लग्ज़री और इलेक्ट्रिक कारें, बाइक और उनके स्पेयर पार्ट्स पर लगने वाली भारी ड्यूटी कम हो सकती है। इससे भारत में प्रीमियम कारें और ई-व्हीकल्स अधिक किफायती हो जाएंगी। इसके साथ ही मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट भी सस्ते होंगे, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को गति मिलेगी।
दूसरी ओर, फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स में भी कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। यूरोप से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, जूते, हैंडबैग और कॉस्मेटिक्स पर टैक्स कम होने से ये प्रोडक्ट्स आम उपभोक्ताओं की पहुंच में आ सकते हैं। इसी तरह वाइन, चीज़, चॉकलेट, ऑलिव ऑयल और अन्य फूड आइटम्स भी सस्ते होने की संभावना है, क्योंकि इन पर आयात शुल्क घटाने पर सहमति बन सकती है।
फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में भी इस डील का असर दिखेगा। यूरोप से आने वाले मेडिकल डिवाइसेज़, एडवांस्ड मशीनें और हेल्थ टेक्नोलॉजी सस्ती होंगी, जिससे इलाज की लागत घट सकती है। वहीं भारत की जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन को EU बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय फार्मा कंपनियों का निर्यात बढ़ेगा।
आईटी, डिजिटल सर्विसेज़ और प्रोफेशनल सेवाओं के क्षेत्र में भी यह समझौता अहम है। भारतीय आईटी कंपनियों को यूरोप में काम करने में आसानी होगी, जिससे रोजगार और रेवेन्यू दोनों बढ़ेंगे। कुल मिलाकर, भारत-EU की यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ उपभोक्ताओं के लिए सस्ती चीजें, उद्योगों के लिए नए मौके और अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत ग्रोथ का रास्ता खोल सकती है।



