
रूस-यूक्रेन युद्ध पिछले ढाई साल से पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इस संघर्ष ने न केवल लाखों निर्दोष लोगों की जानें ली हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाज़ार और खाद्य सुरक्षा पर भी गहरा असर डाला है। ऐसे में यूक्रेन के भारत स्थित राजदूत ने हाल ही में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत ही सबसे सही रास्ता है और इस प्रक्रिया में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
यूक्रेनी राजदूत का मानना है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी छवि है जो किसी भी पक्षपात से ऊपर उठकर संतुलित और निष्पक्ष मानी जाती है। भारत ने हमेशा “वसुधैव कुटुम्बकम” यानी पूरे विश्व को एक परिवार मानने की विचारधारा को बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि चाहे रूस हो या पश्चिमी देश, दोनों ही भारत के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखने में रुचि रखते हैं। इस कूटनीतिक स्थिति का उपयोग कर भारत युद्धरत पक्षों को वार्ता की मेज पर ला सकता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी इस संघर्ष को समाप्त करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने रूस और यूक्रेन दोनों देशों के नेताओं से वार्ता में भाग लेने और शांति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री का बयान, “यह युद्ध का युग नहीं है”, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गूंजा और कई देशों ने इसे भारत की संतुलित और व्यावहारिक सोच का प्रतीक माना।
भारत ने इस युद्ध के दौरान तटस्थ रहते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। एक ओर उसने यूक्रेन को दवाइयां और मानवीय सहायता भेजी, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ ऊर्जा और आर्थिक संबंध भी बनाए रखे ताकि भारत की अपनी जनता को महंगाई और संकट का सामना न करना पड़े। यही संतुलन भारत को एक ‘ब्रिज’ यानी पुल की भूमिका में स्थापित करता है।
यूक्रेनी राजदूत ने साफ कहा है कि बातचीत के बिना इस युद्ध का समाधान असंभव है। सैन्य तरीकों से समस्या केवल और जटिल होगी और आम नागरिक ही सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ऐसे समय में भारत जैसी लोकतांत्रिक और शांति समर्थक शक्ति की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर भारत शांति प्रयासों में मध्यस्थता करता है तो यह न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बनेगा। इससे भारत की कूटनीतिक ताकत और वैश्विक स्तर पर नेतृत्व क्षमता भी और मजबूत होगी।
निष्कर्षतः, यूक्रेनी राजदूत का यह बयान स्पष्ट संकेत है कि भारत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भरोसा करता है और उसे शांति स्थापना का प्रतीक मानता है। आने वाले समय में भारत यदि इस दिशा में ठोस पहल करता है, तो निश्चित ही रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है।



