विकास के साथ पर्यावरण संतुलन जरूरी, बेवजह पेड़ों की कटाई न हो – सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए साफ कहा है कि प्रगति के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग किया जा रहा है, वहां पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नम भूमि यानी वेटलैंड्स के संरक्षण की आवश्यकता बताई और कहा कि ये क्षेत्र जैव विविधता, जल संरक्षण और जलवायु संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इनका अतिक्रमण या विनाश होता है तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि विकास कार्य जरूर हों, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं। उन्होंने वृक्षों की अनावश्यक कटाई रोकने, क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण को प्रभावी बनाने और हर परियोजना में ग्रीन प्लान शामिल करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य है कि सड़क, उद्योग, आवास और बुनियादी ढांचे का विस्तार हो, पर साथ ही हरित क्षेत्र भी बढ़ें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां पेड़ काटना अपरिहार्य हो, वहां कई गुना अधिक पौधे लगाए जाएं और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि नम भूमि केवल पानी भरे क्षेत्र नहीं होते, बल्कि ये प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते हैं, भूजल स्तर को बनाए रखते हैं और बाढ़ जैसी आपदाओं को कम करने में मदद करते हैं। पक्षियों और वन्यजीवों के लिए भी ये सुरक्षित आवास होते हैं। इसलिए इनके संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया कि वेटलैंड्स की पहचान, सीमांकन और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार की मंशा स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश विकास की दौड़ में आगे बढ़े, लेकिन पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को निभाते हुए। मुख्यमंत्री ने आम जनता, सामाजिक संगठनों और युवाओं से भी अपील की कि वे पेड़ बचाने और जल स्रोतों की रक्षा में भागीदार बनें। सामूहिक प्रयासों से ही सतत विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, जहां आधुनिकता और प्रकृति एक साथ आगे बढ़ें।



