
केरल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने इस बार खास रणनीति तैयार की है, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता Narendra Modi और Amit Shah की अहम भूमिका रहने वाली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केरल जैसे पारंपरिक रूप से गैर-बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस बार हाई-वोल्टेज प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रधानमंत्री मोदी कई बड़ी जनसभाओं को संबोधित करेंगे, वहीं अमित शाह संगठन स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ-साथ रणनीतिक बैठकों का नेतृत्व करेंगे। बीजेपी का फोकस इस बार युवा मतदाताओं, पहली बार वोट देने वाले युवाओं और मध्यम वर्ग पर विशेष रूप से रहेगा। पार्टी डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर संपर्क अभियान के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रही है।
केरल की राजनीति लंबे समय से Communist Party of India (Marxist) और Indian National Congress के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन बीजेपी इस बार खुद को तीसरे विकल्प के रूप में मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को सही तरीके से जनता तक पहुंचाकर वह राज्य में अपनी स्थिति बेहतर बना सकती है। इसी के तहत मोदी सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रचारित किया जाएगा।
रणनीति के तहत केरल के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग मुद्दों पर फोकस किया जाएगा, जैसे तटीय इलाकों में मछुआरों से जुड़े मुद्दे, शहरी क्षेत्रों में रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर, और ग्रामीण इलाकों में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं। अमित शाह राज्य के नेताओं के साथ मिलकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, पार्टी स्थानीय नेताओं को भी आगे बढ़ाने की योजना बना रही है ताकि राज्य में एक मजबूत नेतृत्व तैयार हो सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी और अमित शाह की सक्रियता से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। हालांकि, केरल में बीजेपी के लिए चुनौती अभी भी बड़ी है, लेकिन पार्टी की आक्रामक रणनीति से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह रणनीति केरल की राजनीति में कितना असर डाल पाती है।



