
भारतीय राजनीति में शब्दों के वार-पलटवार का दौर हमेशा से चुनावी माहौल को और अधिक गरमाता रहा है। हाल ही में कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने करारा पलटवार किया है। शाह ने अपने बयान में साफ कहा कि “कांग्रेस जितनी गाली देगी, उतना ही देश में कमल खिलेगा।” इस कथन से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस की राजनीति सिर्फ नकारात्मक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों तक सीमित हो गई है, जबकि भाजपा का ध्येय विकास और राष्ट्रहित पर आधारित है।
अमित शाह का यह बयान केवल एक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक शैली पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दस वर्षों में देश को विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी है। गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के उत्थान के लिए जितनी योजनाएँ मोदी सरकार ने चलाई हैं, उनका लाभ सीधे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा है। इसके बावजूद कांग्रेस, constructive राजनीति करने के बजाय केवल आलोचना और अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही है।
भारतीय राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है कि विरोधी दल प्रधानमंत्री या सत्तारूढ़ दल के नेताओं की आलोचना करें, लेकिन जब आलोचना मर्यादा की सीमा पार कर जाती है, तब उसका असर जनता पर उल्टा पड़ता है। अमित शाह ने इस मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं की गालियाँ भाजपा के लिए खाद और पानी का काम करेंगी, और इससे भाजपा का “कमल” और मजबूती से खिलेगा।
चुनावी संदर्भ में देखा जाए तो भाजपा हमेशा से “विकास” और “सुशासन” को अपना मुद्दा बनाती आई है। वहीं कांग्रेस बार-बार व्यक्तिगत हमलों का सहारा लेकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश करती है। शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश की जनता समझदार है और वह गाली-गलौज की राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी। जनता को यह साफ दिखाई दे रहा है कि किस पार्टी ने उनके जीवन स्तर को सुधारने का काम किया है और किसने केवल सत्ता की राजनीति की है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति भाजपा को ही लाभ पहुँचा रही है। जनता, कांग्रेस की भाषा और रवैये से न केवल नाराज़ हो रही है बल्कि उसके प्रति सहानुभूति भी भाजपा की तरफ झुक रही है। यही कारण है कि अमित शाह का आत्मविश्वास झलकता है जब वह कहते हैं कि कांग्रेस जितनी गाली देगी, उतना ही भाजपा का जनसमर्थन बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, अमित शाह का यह पलटवार सिर्फ कांग्रेस को जवाब भर नहीं है बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी है कि 2024 के चुनाव में भाजपा सकारात्मक एजेंडे के साथ जनता के बीच जाएगी, जबकि कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति उसे और पीछे धकेल देगी। जनता गाली से नहीं बल्कि काम और विकास से प्रभावित होती है, और यही भाजपा की असली ताकत है।



