
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए स्वदेशी का मंत्र और “GST बचत उत्सव” का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि सिर्फ देवी की उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है। इसी क्रम में उन्होंने लोगों से अपील की कि इस उत्सव में हम अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं और भारतीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों तथा स्थानीय उद्यमियों का समर्थन करें। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जब हम स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करते हैं तो न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि समाज में रोजगार और अवसर भी बढ़ते हैं।
नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर पीएम मोदी ने “GST बचत उत्सव” की भी चर्चा की और बताया कि सरकार ने आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई वस्तुओं और सेवाओं पर कर में राहत दी है। उनका कहना था कि यह कदम जनता को सीधी बचत देगा और त्योहारों की खरीदारी को और आसान बनाएगा। उन्होंने यह संदेश दिया कि जैसे हम मां दुर्गा से शक्ति और आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं, वैसे ही हमें अपनी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए स्थानीय और स्वदेशी विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के दौरान एक भजन भी साझा किया, जिसमें मां दुर्गा की महिमा और शक्ति का उल्लेख था। यह भजन सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है और लोग इसे भक्ति और प्रेरणा का संगम बता रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि नवरात्रि का यह समय सकारात्मक ऊर्जा से भरने और जीवन में नए संकल्प लेने का होता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संदेश दिया कि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर उद्यमिता तक, हर क्षेत्र में नवाचार और स्वदेशी सोच को आगे बढ़ाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि “GST बचत उत्सव” केवल आर्थिक सुधार का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक को सशक्त बनाने का माध्यम है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और त्योहारी खरीदारी का आनंद भी दोगुना होगा। मोदी ने व्यापारियों और उद्योगपतियों को भी आग्रह किया कि वे ग्राहकों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं उपलब्ध कराएं और “वोकल फॉर लोकल” अभियान को आगे बढ़ाएं।
नवरात्रि के इस मौके पर पीएम मोदी का यह संदेश केवल धार्मिक और आध्यात्मिक भावना तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गौरव का भी स्पष्ट संदेश था। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना हमें यह सिखाती है कि सच्ची शक्ति आत्मनिर्भरता और एकजुटता में ही है। जब देश का हर नागरिक स्वदेशी का मंत्र अपनाएगा और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देगा, तभी भारत विश्व मंच पर आत्मनिर्भर भारत के रूप में और भी मजबूत होकर उभरेगा।



