
77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकली झांकियों में इस बार गृह मंत्रालय की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस झांकी के माध्यम से देश को नए आपराधिक कानूनों की झलक दिखाई गई, जो भारतीय न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक माने जा रहे हैं। झांकी में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि भारत अब दंड प्रधान व्यवस्था से आगे बढ़कर न्याय प्रधान व्यवस्था की ओर कदम बढ़ा चुका है।
गृह मंत्रालय की झांकी में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के प्रमुख प्रावधानों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। डिजिटल तकनीक, पीड़ितों के अधिकार, त्वरित न्याय और पारदर्शिता जैसे विषयों को झांकी का मुख्य आधार बनाया गया। इसमें यह भी दर्शाया गया कि कैसे आधुनिक तकनीक के उपयोग से जांच और न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन हैं। उन्होंने बताया कि इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना और समाज में विश्वास बहाल करना है। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि अब कानून व्यवस्था जनता के प्रति अधिक संवेदनशील, समयबद्ध और जवाबदेह होगी।
झांकी में यह भी दिखाया गया कि नए कानूनों के तहत महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। साइबर अपराध, संगठित अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी सख्त और स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस और न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी को कम करने के लिए तकनीकी सुधारों को अहम स्थान दिया गया है।
दर्शकों ने गृह मंत्रालय की इस झांकी की सराहना की और इसे नए भारत की न्यायिक सोच का प्रतीक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नए कानून देश में कानून का राज मजबूत करेंगे और आम नागरिकों को अधिक भरोसेमंद न्याय प्रणाली उपलब्ध कराएंगे। गणतंत्र दिवस पर इस झांकी के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया कि भारत का लोकतंत्र अब और अधिक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और आधुनिक बन रहा है।



