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‘कुल मिलाकर जीरो’, अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने की ‘ट्रंप टैरिफ’ को दी रेटिंग, बोलीं- उम्मीद पर फेरा पानी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रथम उप-प्रबंध निदेशक और प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की “टैरिफ नीति” को ‘कुल मिलाकर जीरो’ बताया और कहा कि इन नीतियों ने न तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मज़बूत किया और न ही वैश्विक व्यापार को स्थिरता दी। गीता गोपीनाथ के अनुसार, ट्रंप के कार्यकाल के दौरान जो आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए थे, उनका उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों की रक्षा और नौकरियों में वृद्धि करना था, लेकिन वास्तविकता में इन नीतियों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

गीता गोपीनाथ ने अपने विश्लेषण में कहा कि ट्रंप द्वारा चीन, यूरोप और अन्य देशों से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए भारी टैरिफ ने अमेरिकी उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ डाला। आयात महंगे होने से घरेलू वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा। इससे आम अमेरिकी नागरिकों की क्रय शक्ति में गिरावट आई, जबकि विनिर्माण क्षेत्र को उतना लाभ नहीं मिला जितनी उम्मीद की गई थी। उन्होंने कहा कि “अमेरिकी निर्यातक कंपनियों ने भी नुकसान झेला क्योंकि जवाबी कार्रवाई के तहत अन्य देशों ने अमेरिका पर समान या अधिक कठोर टैरिफ लगा दिए।”

गोपीनाथ के अनुसार, ऐसी नीतियों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को भी नुकसान पहुँचाया। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अमेरिका से अपने निवेश घटाए या उन्हें दूसरे एशियाई देशों में स्थानांतरित कर दिया, जिससे आर्थिक असंतुलन पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने वास्तव में अमेरिका को ही नुकसान पहुंचाया।

IMF अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि दीर्घकालिक दृष्टि से ऐसी संरक्षणवादी नीतियाँ (Protectionist Policies) किसी भी देश के लिए टिकाऊ नहीं होतीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था परस्पर जुड़ी हुई है और किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति सहयोग और खुले व्यापार पर निर्भर करती है, न कि सीमाओं और शुल्कों की दीवारें खड़ी करने पर।

गोपीनाथ ने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका को अब अपनी आर्थिक रणनीति को पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता है, ताकि तकनीकी नवाचार, हरित ऊर्जा निवेश और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से विकास को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि “यदि अमेरिका वाकई प्रतिस्पर्धा में आगे रहना चाहता है, तो उसे व्यापार युद्ध नहीं, बल्कि सहयोग का मार्ग अपनाना होगा।”

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप 2024 के चुनावों के बाद फिर से राजनीतिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं और एक बार फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को लेकर प्रचार कर रहे हैं। गीता गोपीनाथ की यह टिप्पणी न केवल ट्रंप की पिछली नीतियों की आलोचना है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक चेतावनी है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता केवल टैरिफ से नहीं, बल्कि संतुलित और सहयोगात्मक नीति से गुजरता है।

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