
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर पाकिस्तान को अपनी कश्मीर पर झूठी बयानबाजी के चलते शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। दरअसल, पाकिस्तान ने कश्मीरी महिलाओं के तथाकथित “उत्पीड़न” का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने करारा जवाब देते हुए पाकिस्तान की पोल खोल दी। भारतीय प्रतिनिधि ने दृढ़ता के साथ कहा कि पाकिस्तान, जो खुद महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का घोर उल्लंघन करता है, उसे कश्मीर पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और पाकिस्तान का इसमें कोई दखल नहीं है।
भारत ने अपने जवाब में कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में महिलाओं की स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, जहां जबरन धर्मांतरण, अल्पसंख्यक महिलाओं का अपहरण और सम्मानजनक जीवन से वंचित करने जैसी घटनाएं आम हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने याद दिलाया कि पाकिस्तान में आज भी कई क्षेत्रों में लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है, और राजनीतिक या सामाजिक रूप से सक्रिय महिलाओं को धमकाया जाता है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा कश्मीरी महिलाओं के अधिकारों पर चिंता जताना सिर्फ एक दिखावा है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, जिसके कारण कश्मीर सहित पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैली हुई है। भारतीय प्रतिनिधि ने तीखे शब्दों में कहा कि जो देश आतंकियों को शरण देता है, उन्हें फंड करता है और उन्हें “स्वतंत्रता सेनानी” बताता है, वह महिलाओं के अधिकारों की बात करने का अधिकारी नहीं है।
भारत ने UNSC में यह भी रेखांकित किया कि कश्मीर आज विकास, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के नए युग में प्रवेश कर चुका है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में महिलाओं को जमीन के अधिकार, सरकारी नौकरियों में अवसर और सुरक्षा की गारंटी मिली है। भारत ने कहा कि वहां की महिलाएं आज खेल, शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं।
भारत के इस तर्कपूर्ण और तथ्यों पर आधारित जवाब के बाद पाकिस्तान पूरी तरह असहज हो गया। कई देशों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से भारत की स्थिति का समर्थन किया और पाकिस्तान की दोगली नीति पर सवाल उठाए।
संयुक्त राष्ट्र में यह घटना भारत की मजबूत कूटनीति और सच्चाई पर आधारित विदेश नीति का एक और उदाहरण बनी। भारत ने न केवल पाकिस्तान की झूठी दलीलों का पर्दाफाश किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह वैश्विक मंचों पर अपनी बात आत्मविश्वास और तथ्यों के साथ रखने में सक्षम है। इस प्रकरण ने एक बार फिर दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान की बयानबाजी से प्रभावित नहीं होता, बल्कि उसे एक जिम्मेदार और परिपक्व राष्ट्र के रूप में भारत की नीतियों पर भरोसा है।



