
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों की शुरुआत की, वहीं इस बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है। वैष्णव ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस सरकार के समय लागू किया गया “परमिट राज” ही असल में सेमीकंडक्टर जैसे उभरते हुए उद्योगों की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना।
मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में लाइसेंस और परमिट पर आधारित व्यवस्था ने न केवल निवेशकों को हतोत्साहित किया बल्कि टेक्नोलॉजी क्षेत्र की वृद्धि को भी रोक दिया। जबकि आज की बीजेपी सरकार पारदर्शी नीतियों और तेज फैसलों के जरिए इस सेक्टर को मजबूत करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं (PLI स्कीम) और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की पहल शामिल है।
अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में उद्योगों के लिए न तो साफ नीति थी और न ही दीर्घकालिक विजन। परिणामस्वरूप, भारत उन देशों से पिछड़ गया जिन्होंने समय रहते सेमीकंडक्टर तकनीक पर निवेश किया। इसके विपरीत आज भारत दुनिया की टॉप कंपनियों को यहां निवेश करने के लिए आकर्षित कर रहा है। गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर हब विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि “परमिट राज” की सोच ने भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों की प्रतिभा को लंबे समय तक दबाकर रखा, लेकिन अब समय बदल चुका है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज देश के पास न केवल नीति समर्थन है बल्कि वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी करने की क्षमता भी है।
वैष्णव का यह बयान विपक्ष द्वारा लगातार किए जा रहे आरोपों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस सरकार बार-बार सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की गति पर सवाल उठाती रही है। मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि असल जिम्मेदारी उन्हीं की है, क्योंकि उनकी गलत नीतियों और लालफीताशाही ने भारत को इस क्षेत्र में पिछड़ा दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपभोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर की मांग को देखते हुए सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार बेहद जरूरी है। इस दिशा में मोदी सरकार की पहल न केवल लाखों युवाओं के लिए रोजगार सृजन करेगी बल्कि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।
इस प्रकार, अश्विनी वैष्णव का कांग्रेस पर यह पलटवार न केवल राजनीतिक बयानबाजी है बल्कि यह संदेश भी देता है कि अब भारत किसी भी कीमत पर “परमिट राज” जैसी बाधाओं में बंधकर नहीं रहना चाहता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।



