
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28वें CSPOC (Conference of Speakers and Presiding Officers of Commonwealth) के उद्घाटन अवसर पर देश और दुनिया को संबोधित करते हुए कहा कि बीते वर्षों में भारत ने गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बताया कि सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, पारदर्शी शासन व्यवस्था और तकनीक आधारित योजनाओं के चलते लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल हुए हैं। पीएम मोदी ने इसे केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण बताया।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 42 देशों से आए 61 स्पीकर्स और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना, विधायी प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना और वैश्विक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया लोकतंत्र के लिए अवसर और चुनौतियां दोनों लेकर आए हैं। इसलिए इन विषयों पर गंभीर, संतुलित और दूरदर्शी चर्चा बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने कहा कि AI का सही उपयोग शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बना सकता है, लेकिन इसके दुरुपयोग से गलत सूचना, फेक न्यूज और सामाजिक विभाजन जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। सोशल मीडिया जहां जनता की आवाज को मंच देता है, वहीं जिम्मेदार उपयोग न होने पर यह लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान भी पहुंचा सकता है। ऐसे में सांसदों, विधायकों और नीति निर्माताओं की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे आधार, यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे तकनीक ने भ्रष्टाचार कम किया और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाया। इसी वजह से गरीबों को आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसी सुविधाएं मिल सकीं।
सम्मेलन के दौरान लोकतंत्र की मजबूती, समावेशी विकास, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तृत मंथन होगा। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि 28वां CSPOC न केवल अनुभव साझा करने का मंच बनेगा, बल्कि भविष्य के लिए ठोस नीतिगत दिशा भी तय करेगा, जिससे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय को नई मजबूती मिलेगी।



