
तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुँच सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि RSS को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाने के लिए गहन जनभागीदारी आवश्यक है। भागवत ने कहा कि जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संघ की सकारात्मक भूमिका स्पष्ट नहीं होगी, तब तक इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य समाज में एकता, सहयोग और सेवा भावना को बढ़ावा देना है।
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि युवा वर्ग को सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना और उन्हें देशभक्ति की भावना से जोड़ना बहुत जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल संगठनात्मक सदस्यता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के हृदय और सोच में बदलाव लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से ही संघ अपने संदेश को प्रभावी रूप से पहुँचा सकता है।
भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां विभिन्न सांस्कृतिक और भाषाई विविधताएँ हैं, वहाँ स्थानीय समाज के साथ गहन जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि RSS का दृष्टिकोण न केवल संगठन को बढ़ाना है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक अपनी गतिविधियों और विचारों को पहुँचाना भी है। इसके लिए संघ के स्वयंसेवकों को समुदाय के बीच सक्रिय रहना होगा, लोगों की समस्याओं को समझना होगा और उनके समाधान में सहयोग करना होगा।
उन्होंने कहा कि संघ की सफलता केवल सदस्यों की संख्या से नहीं बल्कि उनके द्वारा किए गए सकारात्मक योगदान से मापी जानी चाहिए। मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य किसी भी तरह की राजनीति से स्वतंत्र रहकर समाज सेवा और राष्ट्रीय जागरूकता फैलाना है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र में संघ की गतिविधियों को बढ़ावा दें और लोगों के बीच सहयोग और भाईचारे की भावना पैदा करें।
इस तरह, मोहन भागवत ने तमिलनाडु में स्पष्ट संदेश दिया कि RSS का विस्तार और समाज में इसकी स्वीकार्यता केवल जनभागीदारी के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि जब लोग संघ की गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा मानेंगे, तभी इसका वास्तविक प्रभाव समाज पर पड़ेगा।



