
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 60 लाख में से 47 लाख आपत्तियों के निपटारे पर संतोष जताया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस प्रगति को सकारात्मक कदम बताया और संबंधित अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। हालांकि, शेष मामलों के जल्द निपटारे पर भी जोर दिया गया है।
अदालत ने निर्देश दिया कि बाकी बची आपत्तियों को भी तय समय सीमा के भीतर निष्पादित किया जाए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। इस मामले की अगली सुनवाई में शेष प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियों का निपटारा करना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है, लेकिन इसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर आपत्ति की गंभीरता से जांच की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
इसके अलावा, अदालत ने संबंधित एजेंसियों से प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि पूरे मामले की निगरानी की जा सके। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर शेष मामलों का निपटारा नहीं हुआ, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।



