
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए संगठन को एक नया दृष्टिकोण दिया। पीएम मोदी ने एससीओ (SCO) का नया फुल फॉर्म बताते हुए कहा कि यह केवल “शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन” तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ “सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और कोऑपरेशन” यानी सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सहयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह संगठन केवल औपचारिकता तक न रहकर व्यावहारिक सहयोग का मंच बने, तभी सदस्य देशों और पूरी दुनिया के लिए यह उपयोगी सिद्ध होगा।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा आज हर देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आतंकवाद, साइबर अपराध, कट्टरपंथ और उभरते वैश्विक खतरों से निपटने के लिए एससीओ को एकजुट होकर ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी प्रकार की हिंसा, चरमपंथ और आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत हमेशा से शांति, स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा का पक्षधर रहा है, और एससीओ के मंच से भी यही संदेश दिया गया।
कनेक्टिविटी को दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती देना जरूरी है। सड़क, रेल, पोर्ट और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से जब सदस्य देश आपस में जुड़ेंगे, तभी आर्थिक विकास और आपसी समझ का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को पारदर्शिता, सार्वभौमिकता और आपसी सम्मान के आधार पर होना चाहिए।
तीसरे पहलू सहयोग पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दे अकेले किसी देश द्वारा हल नहीं किए जा सकते। इसके लिए सदस्य देशों को मिलकर काम करना होगा। भारत ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं, जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नए निवेश। उन्होंने सदस्य देशों से अपील की कि वे भी सहयोग की भावना को और गहरा करें।
पीएम मोदी के इस नए दृष्टिकोण ने एससीओ की दिशा और दृष्टि को नया आयाम दिया है। जहां पहले यह संगठन सुरक्षा और सामरिक मुद्दों पर अधिक केंद्रित माना जाता था, वहीं अब यह आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग का भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। मोदी का यह संदेश इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत विश्व में न केवल एक जिम्मेदार शक्ति है बल्कि भविष्य के लिए मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा रहा है।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का “सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और कोऑपरेशन” का संदेश आज की वैश्विक जरूरतों के अनुरूप है। यह एससीओ को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने वाला मंत्र है, जिससे सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, विकास और स्थिरता को और मजबूती मिलेगी।



