
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लेकर भारत की राजधानी दिल्ली तक मंगलवार देर रात धरती डोल उठी। अचानक आए इस भीषण भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.4 दर्ज की गई। इसका केंद्र अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा के पास स्थित पर्वतीय क्षेत्र बताया गया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं।
तेज झटकों के कारण काबुल, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान के कई हिस्सों में इमारतें हिल गईं। लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों और इमारतों से बाहर भागने लगे। अफगानिस्तान के कई इलाकों में पुराने मकान ध्वस्त हो गए, जिससे जनहानि और बढ़ गई। पाकिस्तान के पेशावर, इस्लामाबाद और लाहौर तक भूकंप के झटके महसूस किए गए। वहीं, भारत में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भी देर रात धरती हिलती महसूस हुई।
भूकंप का असर इतना तेज था कि दिल्ली-एनसीआर में लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना के वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिसमें डर के माहौल को साफ देखा जा सकता है। हालांकि भारत में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन पड़ोसी देशों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत का यह हिस्सा अक्सर भूकंप की चपेट में आता रहता है। पिछले एक दशक में कई बार यहां बड़े पैमाने पर भूकंप आ चुके हैं, जिनमें हजारों लोगों की जान गई है।
सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आपदा प्रबंधन टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटी हैं। वहीं भारत में भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने स्थिति पर करीबी नजर रखी हुई है।
भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यदि भविष्य में दोबारा झटके आते हैं तो लोग तुरंत खुली जगह में निकल जाएं और किसी मजबूत इमारत या ऊंची दीवार के पास खड़े न हों।
यह भूकंप एक बार फिर हमें यह याद दिलाता है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम भूकंप-रोधी भवनों का निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारियां और जनजागरूकता को मजबूत करें ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।



