
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ट्रंप प्रशासन द्वारा 8 साल पुराने एक महत्वपूर्ण नीति निर्णय को पलटने के बाद थरूर ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह कदम QUAD (क्वाड) जैसे रणनीतिक समूह के भविष्य के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। उन्होंने इसे “क्वाड के ताबूत में आखिरी कील” जैसी स्थिति करार देते हुए चिंता जताई कि इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग की भावना प्रभावित हो सकती है।
थरूर का मानना है कि क्वाड केवल एक सुरक्षा या सामरिक मंच नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग और संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे में अमेरिका की नीति में अचानक बदलाव सहयोगी देशों के बीच विश्वास को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की मजबूती के लिए नीतिगत निरंतरता बेहद जरूरी होती है।
क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस समूह ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास और आपदा प्रबंधन जैसे कई मुद्दों पर मिलकर काम किया है। इसलिए सदस्य देशों की नीतियों में बड़े बदलाव को वैश्विक रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के फैसले का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट होगा। हालांकि, शशि थरूर की टिप्पणी ने इस मुद्दे को राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है।
निष्कर्ष:
ट्रंप के फैसले और उस पर शशि थरूर की प्रतिक्रिया ने क्वाड की भूमिका और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया से यह साफ हो सकेगा कि इस फैसले का क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर कितना असर पड़ता है।



