उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रयागराज-विंध्याचल मंडल के विधायकों के साथ एक उच्चस्तरीय विकास समीक्षा बैठक की, जिसका उद्देश्य मंडल के जिलों में चल रही विकास परियोजनाओं की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करना था। यह बैठक राजनीतिक दृष्टिकोण से भी खास बन गई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि उन्हें इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया।
सपा विधायक का कहना था कि यह बैठक किसी मंडल के सर्वदलीय प्रतिनिधित्व वाली समीक्षा बैठक नहीं बल्कि भाजपा की आंतरिक बैठक जैसी थी, जिसमें केवल पार्टी के विधायकों को बुलाया गया। एक विधायक ने कहा, “अगर सरकार वास्तव में विकास की बात कर रही है, तो सभी जनप्रतिनिधियों को बुलाना चाहिए था, चाहे वे किसी भी पार्टी से हों।”
हालांकि इस बैठक में एक और बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया जब सपा से बागी बनीं पूजा पाल भी वहां पहुंच गईं। पूजा पाल, जो लंबे समय से सपा से दूरी बनाए हुए हैं और भाजपा के प्रति झुकाव दिखा रही हैं, उनके इस बैठक में भाग लेने को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके उपस्थित होने ने न केवल सपा के भीतर खलबली मचाई बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या वे जल्द भाजपा में शामिल हो सकती हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही समेत पूरे विंध्याचल मंडल की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति का ब्यौरा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से जुड़े कामों में लापरवाही न हो और समयसीमा में काम पूरे हों।
योगी ने कहा, “विकास दल से नहीं, नीयत और नीतियों से होता है। जिन जनप्रतिनिधियों ने जनता को जवाब देना है, उन्हें पूरी जानकारी और सहभागिता दी जानी चाहिए।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विपक्षी विधायकों को आमंत्रण क्यों नहीं भेजा गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक सिर्फ विकास के नजरिए से नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की झलक भी देती है। भाजपा अपने मजबूत क्षेत्रों में फिर से पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय हो रही है।
निष्कर्षतः, मुख्यमंत्री की यह बैठक विकास के साथ-साथ राजनीतिक संकेतों से भी भरपूर रही। जहां एक ओर सपा विधायकों की नाराजगी देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर पूजा पाल जैसे नेताओं की उपस्थिति से आगामी राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना भी दिखाई दी। आने वाले दिनों में इस बैठक के सियासी असर साफ तौर पर दिखाई देंगे।



