
असम सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य में बहुविवाह (एक से अधिक विवाह करने की प्रथा) पर पूरी तरह रोक लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में सामाजिक सुधार लाना और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता और महिला सम्मान की दिशा में एक ठोस कदम है। असम सरकार का यह फैसला सामाजिक समरसता, महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा एक से अधिक विवाह करने पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान होगा।
विधेयक के प्रारूप के अनुसार, जो व्यक्ति पहले से विवाहित है और दोबारा विवाह करता है, उसे 3 से 5 साल तक की सजा और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कानून धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, बल्कि यह समान रूप से सभी नागरिकों पर लागू होगा।
इस विधेयक के जरिए असम सरकार ने यह संदेश दिया है कि राज्य में महिलाओं की गरिमा और पारिवारिक मूल्यों से समझौता नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री सरमा ने कई बार कहा था कि असम सरकार “समान नागरिक संहिता” की दिशा में काम कर रही है और यह कदम उसी का एक हिस्सा है।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य में कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन लाएगा। वहीं विपक्ष ने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह कदम समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।



