
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि भारत के जिन राज्यों में सबसे अधिक विदेशी कैदी बंद हैं, उनमें पश्चिम बंगाल शीर्ष पर है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जेलों में कुल विदेशी कैदियों में से लगभग 35 प्रतिशत से अधिक अकेले पश्चिम बंगाल की जेलों में बंद हैं। इन विदेशी कैदियों में ज्यादातर पड़ोसी देशों — बांग्लादेश, म्यांमार और नेपाल — के नागरिक शामिल हैं।
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र का स्थान आता है। इन राज्यों में भी बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक विभिन्न अपराधों में सजा काट रहे हैं या ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सीमा पार से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने, तस्करी, जालसाजी, और मानव तस्करी जैसे अपराध प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति इसे विदेशी अपराधियों की गतिविधियों के लिए संवेदनशील बनाती है। बांग्लादेश के साथ इसकी लंबी खुली सीमा होने के कारण अवैध घुसपैठ और सीमा अपराधों के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। कई मामलों में ऐसे विदेशी नागरिकों को पकड़ा जाता है जो लंबे समय से भारत में अवैध रूप से रह रहे होते हैं या फर्जी दस्तावेजों के जरिए यहां काम कर रहे होते हैं।
NCRB रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन कैदियों में बड़ी संख्या में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं। वहीं, विदेशी कैदियों की रिहाई या उनके देश वापसी में देरी का एक बड़ा कारण दोनों देशों के बीच औपचारिक कागजी प्रक्रिया और कानूनी अड़चनें हैं। भारत सरकार ने इन मामलों में तेजी लाने के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
यह रिपोर्ट न केवल भारत की जेल प्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि सीमा सुरक्षा और विदेशी नागरिकों की निगरानी से जुड़े तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर देती है। NCRB के ये आंकड़े देश के सुरक्षा ढांचे को और सशक्त बनाने की दिशा में चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं।



