देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शुमार तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला है गैर-हिन्दू कर्मचारियों की नियुक्ति का, जिसे लेकर केंद्रीय मंत्री ने तीव्र आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि “यह सिर्फ एक नियुक्ति का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल है।” मंत्री ने देवस्थानम प्रशासन से तुरंत इन नियुक्तियों को रद्द करने और संबंधित व्यक्तियों को हटाने की मांग की है।
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब सोशल मीडिया पर यह जानकारी तेजी से वायरल हो रही है कि TTD प्रशासन ने कुछ गैर-हिन्दू कर्मचारियों को मंदिर परिसर में नियुक्त किया है। यह मुद्दा न सिर्फ धार्मिक स्तर पर संवेदनशील है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और नीतियों पर भी सवाल खड़े करता है।
TTD, जो कि भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर का संचालन करता है, को विशेष धार्मिक नियमों और परंपराओं के तहत चलाया जाता है। इन परंपराओं में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि केवल हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति ही मंदिर के भीतर किसी भी प्रकार की सेवा या कार्य में नियुक्त हो सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री के बयान ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा, “जब देश भर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, तो उन्हें यह विश्वास होता है कि यहां की हर परंपरा और हर सेवा धार्मिक आस्था और मर्यादाओं के अनुरूप होती है। गैर-हिन्दुओं की नियुक्ति उस विश्वास को ठेस पहुंचाती है।”
TTD प्रशासन ने इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी गई है। कुछ समूहों और हिन्दू संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है और कहा है कि यदि यह स्थिति सुधारी नहीं गई तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
यह पूरा विवाद एक बार फिर धर्म और प्रशासन के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। जहां एक ओर संविधान सभी को समान अवसर की बात करता है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्थलों की आस्था और परंपरा का भी सम्मान किया जाना जरूरी है।



