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ट्रंप ने मानी पुतिन की बात, जेलेंस्की से बैठक को हुए तैयार – जानिए कहां हो सकती है तीनों नेताओं की मुलाकात

दुनिया की नज़र अब उस संभावित बैठक पर टिक गई है जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की एक ही मंच पर आमने-सामने हो सकते हैं। यह चर्चा तब और तेज़ हो गई जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे पुतिन की सलाह मानने को तैयार हैं और जेलेंस्की से सीधी बैठक के लिए सहमत हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने यूक्रेन-रूस युद्ध में संभावित कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें जगा दी हैं।

सूत्रों के अनुसार, पुतिन ने हाल ही में ट्रंप को एक गैर-आधिकारिक चैनल के माध्यम से यह प्रस्ताव दिया कि यदि वे जेलेंस्की से शांति वार्ता के लिए तैयार होते हैं, तो यह युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। ट्रंप, जो 2024 के अमेरिकी चुनावों के बाद से अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से सक्रिय हो गए हैं, ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और कहा कि वे जेलेंस्की से मिलने के इच्छुक हैं — बशर्ते बैठक “तटस्थ और रचनात्मक माहौल” में हो।

अब सवाल यह है कि यह ऐतिहासिक त्रिपक्षीय बैठक कहां हो सकती है। कूटनीतिक हलकों में जिन स्थानों पर विचार किया जा रहा है उनमें स्विट्ज़रलैंड, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन देशों की विदेश नीति अपेक्षाकृत संतुलित मानी जाती है और वे पहले भी शांति वार्ताओं के लिए मंच प्रदान कर चुके हैं। दुबई, जिनेवा या अंकारा इस बैठक के संभावित स्थल हो सकते हैं।

इस संभावित बैठक को लेकर वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। यूरोपीय यूनियन ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि कोई भी कदम जो युद्ध को समाप्त करने की दिशा में हो, उसका समर्थन किया जाना चाहिए। वहीं अमेरिका में बाइडेन प्रशासन ने इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ट्रंप के बढ़ते कूटनीतिक दखल को लेकर चिंता ज़रूर जताई जा रही है।

यूक्रेन की तरफ से भी संकेत मिले हैं कि यदि अमेरिका इस बैठक में शामिल होता है और रूस कोई ठोस शांति प्रस्ताव लाता है, तो जेलेंस्की इस वार्ता के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि किसी भी बातचीत की शर्त यह होगी कि यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि भले ही युद्धभूमि पर गोलियों की आवाजें अभी बंद नहीं हुई हैं, लेकिन शांति की दिशा में एक नया कूटनीतिक मोर्चा खुल चुका है। ट्रंप की इस पहल को कुछ लोग राजनीतिक रणनीति भी मानते हैं, लेकिन अगर इससे युद्ध को समाप्त करने की कोई राह निकलती है, तो यह वैश्विक शांति के लिए एक बड़ी जीत होगी।

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