
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1-B वीजा के नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं, जिससे विशेष श्रेणी के विदेशी कर्मचारियों को भारी भरकम फीस से छूट मिल सकेगी। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को ग्रामीण और कम आबादी वाले क्षेत्रों से विशेषज्ञ कर्मचारियों को आकर्षित करना और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना बताया गया है। H1-B वीजा आमतौर पर तकनीकी और पेशेवर कर्मचारियों के लिए जारी किया जाता है, और इसमें शामिल होने वाले कर्मचारियों को बहुत बड़ी फीस और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है।
इस नए नियम के तहत, अमेरिका के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले H1-B वीजा प्राप्तकर्ताओं को अब उन शुल्कों का भुगतान नहीं करना होगा, जो पहले अनिवार्य थे। इसका मतलब है कि टेक कंपनियों और अन्य व्यवसायों को वहां काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को लाने में आसानी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिका के ग्रामीण और कम विकसित इलाकों में रोजगार और निवेश को बढ़ावा देगा।
इस पहल से अमेरिकी ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होने की उम्मीद है। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि इससे देश के तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों की संख्या तो बनी रहेगी, लेकिन बड़ी कंपनियों द्वारा छोटे शहरों में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नियम का सीधा असर उन पेशेवरों पर पड़ेगा, जो पहले H1-B वीजा के भारी शुल्क के कारण अमेरिका में काम करने से हिचकिचा रहे थे। अब उन्हें फीस में राहत मिलने के साथ-साथ अमेरिका के छोटे शहरों में रोजगार के अवसर मिलेंगे।
यह बदलाव अमेरिका और भारत समेत कई अन्य देशों के बीच तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में सहयोग को भी प्रभावित कर सकता है। भारत से आईटी और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए यह अवसर नए दरवाजे खोल सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी साझेदारी और मजबूत होगी।



