
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर एक चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने 9/11 के आतंकी हमलों से एक साल पहले ओसामा बिन लादेन के खतरे की चेतावनी दी थी। इसके साथ ही उन्होंने इस चेतावनी का श्रेय भी मांगा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि 2000 में प्रकाशित अपनी पुस्तक “द अमेरिका वी डिजर्व” में उन्होंने स्पष्ट रूप से ओसामा बिन लादेन को अमेरिका के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में चिह्नित किया था। उनका कहना है कि उन्होंने लिखा था कि बिन लादेन अमेरिकी शहरों पर हमला करने की योजना बना रहा है और इसके लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रहा है।
इस दावे को लेकर राजनीतिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि यह उनकी दूरदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा की समझ का प्रमाण है। वहीं, आलोचकों का मानना है कि यह केवल राजनीतिक फायदा उठाने का प्रयास है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 9/11 से पहले कई खुफिया एजेंसियों और विश्लेषकों ने अल-कायदा और बिन लादेन के बारे में चेतावनी दी थी। 1998 में केन्या और तंजानिया के अमेरिकी दूतावासों पर हमले के बाद से ही बिन लादेन को एक प्रमुख आतंकी माना जा रहा था। 2000 में यूएसएस कोल पर हमले ने इस खतरे को और भी स्पष्ट कर दिया था।
ट्रंप के इस दावे की सत्यता की जांच करने वाले फैक्ट-चेकर्स ने कहा है कि उनकी पुस्तक में वास्तव में बिन लादेन का उल्लेख है, लेकिन यह उतना विस्तृत या पैगंबरी नहीं था जितना वे अब दावा कर रहे हैं। पुस्तक में बिन लादेन को एक खतरे के रूप में वर्णित किया गया था, लेकिन विशिष्ट हमले की भविष्यवाणी नहीं की गई थी।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रंप के इस दावे की आलोचना करते हुए कहा है कि वे एक राष्ट्रीय त्रासदी का राजनीतीकरण कर रहे हैं। उनका कहना है कि 9/11 के हमलों में हजारों निर्दोष लोगों की मौत हुई थी और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना अनुचित है।
इस विवाद के बीच, राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि 9/11 के हमलों की रोकथाम के लिए कई स्तरों पर चूक हुई थी। केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं था, बल्कि उस पर कार्रवाई करना आवश्यक था।



