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ट्रंप का पुतिन-जेलेंस्की को कब्जे की जमीन अदला-बदली का प्रस्ताव, जानें रूस के पास यूक्रेन की कितनी जमीन है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एक विवादित लेकिन चर्चित प्रस्ताव दिया है। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से कहा है कि “कब्जे की जमीन अदला-बदली कर लो” और इस युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालो। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जब रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर सैन्य कार्रवाई करते हुए कब्जा कर लिया था। इसमें सबसे प्रमुख हैं — डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़्झिया क्षेत्र, जिनका रूस ने आधिकारिक रूप से “अपने में विलय” करने का दावा किया है। इसके अलावा, क्रीमिया प्रायद्वीप पर रूस पहले से ही 2014 से कब्जा जमाए हुए है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्तमान में रूस के कब्जे में यूक्रेन की लगभग 18% भूमि है, जो रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इन इलाकों में न केवल औद्योगिक और कृषि संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, बल्कि काला सागर तक पहुंच और सैन्य दृष्टि से भी इनकी अहमियत है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि लंबे समय तक युद्ध जारी रखने से दोनों देशों को भारी आर्थिक, सामाजिक और मानवीय नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, अगर दोनों पक्ष कुछ जमीन के बदले में स्थायी शांति पर सहमत हो जाएं, तो यह भविष्य के लिए बेहतर होगा। हालांकि, यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए बेहद संवेदनशील और विवादास्पद है, क्योंकि यूक्रेन का मानना है कि उसकी भूमि पर किसी भी तरह का समझौता राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ होगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे कब्जे की किसी भी इंच जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर, रूस लगातार दावा करता रहा है कि कब्जाए गए इलाके अब स्थायी रूप से उसके नियंत्रण में रहेंगे। ऐसे में ट्रंप का यह सुझाव मौजूदा हालात में लागू होना कठिन दिख रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा भी ट्रंप के इस बयान को लेकर विभाजित है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है, क्योंकि युद्ध लंबा खिंचने पर जान-माल का नुकसान और बढ़ेगा। वहीं, कई देशों का कहना है कि यह प्रस्ताव आक्रामक सैन्य कार्रवाई को वैध ठहराने जैसा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यवस्था के खिलाफ होगा।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ अब भी युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो रूस पीछे हटने को तैयार है और न ही यूक्रेन झुकने को। ऐसे में, ट्रंप का यह “जमीन अदला-बदली” वाला विचार भले ही चर्चा में है, लेकिन निकट भविष्य में इसके लागू होने की संभावना कम ही दिखती है।

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