
तुर्किए और अज़रबैजान को पाकिस्तान का साथ देना अब भारी पड़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था, जिसका असर अब उनके पर्यटन उद्योग पर देखने को मिल रहा है। भारतीय सैलानियों ने तुर्किए और अज़रबैजान की यात्रा पर रोक लगाते हुए अपने रुख से साफ कर दिया है कि भारत विरोधी रुख अपनाने वालों को अब आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
हाल के महीनों में भारत से तुर्किए और अज़रबैजान जाने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। भारतीय ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक, पहले जहां हर महीने हजारों भारतीय पर्यटक इन देशों का रुख करते थे, वहीं अब यह संख्या आधी से भी कम रह गई है। तुर्किए और अज़रबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन कई बार कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किया था, जिससे भारतीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ी।
भारतीय सैलानियों ने इसके जवाब में दुबई, सिंगापुर, थाईलैंड, श्रीलंका और यूरोपीय देशों को अपनी पसंदीदा पर्यटन सूची में शामिल करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी “Boycott Turkey” और “Boycott Azerbaijan” जैसे हैशटैग ट्रेंड कर चुके हैं। कई भारतीय ट्रैवल इन्फ्लुएंसर और ब्लॉगर्स ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे देशों में पैसा खर्च न करें जो भारत के विरोध में खड़े हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सैलानियों के इस कदम से तुर्किए और अज़रबैजान की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि भारत दोनों देशों के लिए पर्यटन राजस्व का एक बड़ा स्रोत था। 2023-24 में जहां तुर्किए ने भारतीय पर्यटकों से करोड़ों डॉलर की कमाई की थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा तेजी से गिरा है।
यह कदम इस बात का प्रतीक है कि अब भारतीय नागरिक भी अपनी विदेश नीति के प्रति सजग और संवेदनशील हो चुके हैं। वे केवल दर्शक नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रहित के लिए आर्थिक जवाब देने की ताकत रखते हैं। तुर्किए और अज़रबैजान को अब यह समझना होगा कि पाकिस्तान के साथ खड़ा होना राजनीतिक रूप से भले रणनीति लगे, लेकिन आर्थिक रूप से यह आत्मघाती साबित हो सकता है।



