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यूक्रेन सेना में अब 60+ उम्र के लोग भी होंगे शामिल

रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक लंबे और थकाऊ संघर्ष में तब्दील हो चुका है, और इसी बीच यूक्रेन सरकार ने अपनी सैन्य नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक नई पहल की घोषणा की है, जिसके तहत अब 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक भी यूक्रेनी सेना में शामिल हो सकेंगे। यह फैसला न केवल सैन्य संसाधनों को मज़बूती देने के लिए लिया गया है, बल्कि यह देशभक्ति और नागरिक भागीदारी को भी नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है।

यूक्रेन पिछले दो वर्षों से लगातार रूसी हमलों का सामना कर रहा है। हजारों सैनिक युद्ध में घायल या शहीद हो चुके हैं। युद्ध की अवधि लंबी होने से सेना को लगातार नई भर्तियों की जरूरत है। ऐसे में 60 वर्ष से ऊपर के अनुभवशील नागरिकों को सेवा में शामिल करना एक रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।

सरकारी बयान के अनुसार, इस आयु वर्ग के लोगों को सक्रिय युद्ध क्षेत्र में तैनात करने की बजाय, उन्हें प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, संचार, खुफिया और तकनीकी सहायता जैसे कार्यों में लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं पर से बोझ को थोड़ा हल्का करना और अनुभवी नागरिकों की क्षमताओं का सही उपयोग करना है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, “हर यूक्रेनी नागरिक, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, देश की रक्षा में अपनी भूमिका निभा सकता है। हमारी यह पहल सैन्य और नैतिक दोनों स्तरों पर हमें मजबूती देगी।”

इस फैसले को देशवासियों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। कई लोगों ने इस कदम का समर्थन किया है, इसे देशभक्ति का प्रतीक माना है, वहीं कुछ लोगों ने इसे वृद्धजनों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए आलोचना भी की है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही किसी को शामिल किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला युद्ध की गंभीरता और यूक्रेन के सैन्य दबाव को दर्शाता है। जहां एक ओर यह देश की सामूहिक ताकत को उजागर करता है, वहीं यह भी स्पष्ट करता है कि युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कितनी सख्त जरूरत है।

यूक्रेन का यह कदम दुनिया भर के लिए एक संकेत है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सीमाओं का नहीं, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी का युद्ध बन चुका है। आने वाले महीनों में यह देखा जाएगा कि यह नीति जमीनी स्तर पर कितनी कारगर साबित होती है और युद्ध के मोर्चे पर क्या बदलाव लाती है।

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