
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा की आंसर-की में कथित विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कानूनी रास्ता अपनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, 63 अभ्यर्थी इस मामले को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) पहुंचे हैं।
अभ्यर्थियों की मुख्य आपत्ति परीक्षा के कुछ प्रश्नों के उत्तरों को लेकर बताई जा रही है। उनका आरोप है कि आंसर-की में दिए गए कुछ उत्तरों को लेकर असहमति है और इसका असर परीक्षा के परिणाम तथा उनकी मेरिट पर पड़ सकता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी IAS, IPS और अन्य केंद्रीय सेवाओं में चयन के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा के मूल्यांकन और उत्तरों की शुद्धता का सीधा असर अभ्यर्थियों के अगले चरण में पहुंचने पर पड़ता है।
CAT में मामला पहुंचने के बाद अब अभ्यर्थियों की आपत्तियों और उनके द्वारा पेश किए गए तथ्यों पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। मामले में संबंधित पक्षों के तर्क और दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। अंतिम स्थिति अधिकरण की कार्यवाही और संबंधित निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।
आंसर-की को लेकर विवाद होने पर अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि संबंधित प्रश्नों के उत्तर किस आधार पर सही माने गए हैं। परीक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों की ओर से अक्सर आधिकारिक उत्तरों के साथ विषय विशेषज्ञों की राय की भी तुलना की जाती है।
UPSC परीक्षा में प्रारंभिक चरण महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके आधार पर अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं। इसलिए किसी प्रश्न के उत्तर में बदलाव या मूल्यांकन में सुधार की स्थिति कई अभ्यर्थियों के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल UPSC Prelims 2026 की आंसर-की को लेकर उठे विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। CAT में दायर मामले में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाया जाता है और परीक्षा परिणाम पर इसका कोई असर पड़ता है या नहीं।



