
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए बयान— “हमने भारत जैसा अहम पार्टनर खो दिया”—को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है, और इसी बयान पर भारत की विपक्षी सांसद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सांसद ने कहा कि ट्रंप का यह दावा न केवल अमेरिका की विदेश नीति की मौजूदा अस्थिरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैश्विक नेतृत्व के स्तर पर बड़े देशों के बीच रिश्तों को लेकर कितनी गलतफहमियाँ पनप रही हैं। उन्होंने इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हाल ही में सामने आई तस्वीर का ज़िक्र किया और कहा कि दुनिया भर में बदलते समीकरणों के इस दौर में भारत जैसे देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के सिद्धांतों पर चलते हुए हर प्रमुख राष्ट्र के साथ संतुलन बनाए रखते हैं।
विपक्षी सांसद ने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ पर जोर दिया है और किसी एक धुरी के साथ खड़े होने के बजाय बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन किया है। उनके अनुसार, मोदी–पुतिन की तस्वीर यह दर्शाती है कि भारत के लिए रूस अभी भी एक महत्वपूर्ण रक्षा और ऊर्जा साझेदार है, और इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि भारत–अमेरिका संबंध कमजोर हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणी यह संकेत देती है कि वो भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को ठीक से समझ नहीं पा रहे।
सांसद ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत–अमेरिका संबंधों में रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। ऐसे में ट्रंप का यह दावा कि अमेरिका ने भारत जैसा महत्वपूर्ण पार्टनर खो दिया, तथ्यों से परे है और केवल राजनीतिक बयानबाज़ी के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि एक ओर दुनिया में रूस–यूक्रेन युद्ध और पश्चिम–चीन तनाव जैसे मुद्दों ने वैश्विक शक्ति संरचना को बदल दिया है, वहीं भारत अपनी स्थिति को बहुत सोच-समझकर एक संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण के माध्यम से मजबूत कर रहा है। मोदी–पुतिन की मुलाकात इसी निरंतरता का हिस्सा है। सांसद के अनुसार, लोकतांत्रिक देशों को एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय यह समझना चाहिए कि आज की दुनिया में साझेदारी और हित स्थिर नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भारत किसी भी वैश्विक शक्ति का “खोया हुआ पार्टनर” नहीं है, बल्कि वह अपने हितों और सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।



