
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि “अमेरिका के पास इतनी परमाणु शक्ति है कि हम 150 बार दुनिया को तबाह कर सकते हैं।” ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जहां कुछ लोगों ने इसे अमेरिकी सैन्य क्षमता पर गर्व का प्रदर्शन बताया, वहीं कई विश्लेषकों ने इसे गैरजिम्मेदाराना बयान करार दिया है।
ट्रंप ने यह टिप्पणी अमेरिकी रक्षा नीति और वर्तमान प्रशासन की विदेश रणनीति पर सवाल उठाते हुए दी। उन्होंने कहा कि बाइडेन प्रशासन की “कमजोर विदेश नीति” के कारण अमेरिका की ताकत दुनिया के सामने कमजोर दिख रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका न केवल आर्थिक रूप से मजबूत था, बल्कि दुश्मन देशों को भी अमेरिका से डर लगता था। ट्रंप ने कहा कि “हमारे पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु भंडार है, जो किसी भी देश को मिटाने की क्षमता रखता है। अगर जरूरत पड़ी तो हम 150 बार दुनिया को तबाह कर सकते हैं।”
उनके इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। संयुक्त राष्ट्र से लेकर यूरोपीय देशों तक ने इसे “खतरनाक सोच” बताया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकते हैं, खासकर तब जब रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश पहले से ही अपनी परमाणु क्षमता को लेकर सक्रिय हैं।
ट्रंप का यह बयान अमेरिका की चुनावी राजनीति से भी जुड़ा माना जा रहा है। वे 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में दोबारा मैदान में हैं और अपने समर्थकों के बीच “मजबूत नेता” की छवि को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान न केवल उनकी विदेश नीति की झलक देता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि वे किसी भी परिस्थिति में अमेरिका को “सर्वोच्च शक्ति” बनाए रखने के पक्षधर हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह के बयानों से परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ सकता है और वैश्विक शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचता है। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में लेकर आया है—जहां उनके समर्थक इसे “अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन” मानते हैं, वहीं विरोधी इसे “खतरनाक अहंकार” कह रहे हैं।



